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सुप्रीम कोर्ट ने कहा :- ताजमहल को बंद कर दो या गिरा दो

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सुनैना सहोता-------दुनिया के सात अजूबो में से एक अजूबा है ताज महल। जिसे प्यार का प्रतिक माना जाता है। कहा जाता है की शाहजांह ने यह प्रतिक अपनी पत्नी मुमताज की याद में बनवाया था। ताजमहल भारत के आगरा शहर में स्थित है। शाहजहाँ ने ताजमहल के निर्माण अपने मुग़ल शाशन(1628-1658 ) में शुरू करवाया था। ताजमहल की शुरुआत 1632 में हुई। ताजमहल यमुना के किनारे पर बनाया गया है। ताजमहल के प्रधान उुस्ताद अहमद लाहोरी थे। जिनकी देख-रेख कार्य शुरू करवाया गया। ताजमहल बनाने के लिए संगमरमर पत्थरों का इस्तेमाल किया गया ,जो विश्व के कई देशों से मंगवाया गया। यह प्यार की निशानी जो पूरी दुनिया में प्रचलित है। यह ताजमहल 17 हेक्टेअर्स की जगह पर फैला हुआ है। ताजमहल की ऊचाई 73 मीटर है। जिसे बनाने के लिए 25,000 से भी ज्यादा कारीगरों ने काम किया। जिसमें चित्रकार , कड़ाईकार, सुलेख , कलाकार तथा 1000 हाथीयो आदि शामिल थे। ताजमहल बनाने के लिए 32 मिलियन का ख़र्च हुआ। 1643 . में इसका काम चलता रहा , परंतु ताजमहल में सुंदरता नहीं दिखाई दी और इसकी सुंदरता को बढ़ाने के लिए ओर 10 साल लगे। जो की 1653 में बनकर तैयार हुआ। 1983 . में ताजमहल को दुनिया के सात अजूबो में शामिल किया और इसे इस्लामी कला का रत्न घोषित किया। इस प्यार के प्रतीक को  देखने के लिए 9 से 10 मिलियन के करीब लोग इसे देखने आते है। ताजमहल का उल्लेख रविंदर नाथ टैगोर ने अपने लेख the tear drop of the chief of time में वर्णन किया है। जिस में लिखा गया कि मानसून की पहली बारिश की बुँदे मक़बरे पर गिरती है। प्राचीन काल में बनाया गया। ताजमहल में मुमताज़ की कबर है, जिस के साथ ही अब शाहजहाँ की कबर भी हैं।

लेकिन दूसरी तरफ इस प्रचलित अजूबे को सुप्रीम कोर्ट ने गिरा देने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने नराजगी जाहिर करते हुए कहा अगर इसकी देख-रेख नहीं कर  सकते तो इसे गिरा दिया जाये यह बंद कर दिया। क्योंकि ताजमहल के आस-पास बहुत-सी फैक्टरीया है, जिसके कारण प्रदुषण से ताजमहल की चमक फीकी पड़ रही हैं। नाराज़ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक ओर फ्रांस के एफ़िल टॉवर को देखने 80 मिलियन लोग आते है, जबकि ताजमहल के लिए सिर्फ 5 मिलियन, आप लोग ताजमहल को लेकर गंभीर नहीं है और ही आपको इसकी परवाह है. आप टूरिस्ट को लेकर गंभीर नहीं है. आपकी वजह से ये देश की धरोहर का नुकसान हो रहा है, ताजमहल को लेकर घोर उदासीनता है.क्योंकि आपको ताज को बचाने, टूरिस्टों के लिए सुविधा जुटाने से ज़्यादा इसे बिगाड़ने की चिंता है. तभी तो आपने उद्योग लगाने की अर्ज़ियां ले ली हैं। सुप्रीम कोर्ट ने फिर सवाल उठाया कि Taj Trapezium Authority (TTZ) में उद्योग लगाने के लिए लोग आवेदन कर रहे है और उनके आवेदन पर विचार भी हो रहा है। जस्टिस मदन भीमराव लोकुर ने ताज के संरक्षण और रखरखाव को लेकर केंद्र सरकार और उसके संस्थान ASI की उदासीनता पर गुस्सा जताते हुए कहा कि अगर इसे संभाल नहीं सकते तो इसे ढाह दीजिये।

अभी कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि ताज महल सात अजूबों में शामिल है, यहां नमाज नहीं पढ़ सकते हैं. नमाज किसी और जगह भी पढ़ सकते हैं. हालांकि, स्थानीय नमाजी अभी भी नमाज पढ़ सकते हैं. जिसके बाद बाहरी लोगों के नमाज पढ़ने पर पाबंदी हो गई थी.

 

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