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PUNJAB GOVERNMENT CONFIRMED NO TERMINATION

स्मार्ट कार्ड का मामला पहुंचा कोर्ट - पंजाब सरकार ने किया कन्फर्म , नहीं हुआ कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट टर्मिनेशन - पढ़े ड्राइविंग लइसेंस और आरसी बनाने वाली स्मार्ट चिप प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का पूरा प्रेस नोट

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बीते हफ्ते लगी थी ये खबर 
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पंजाब में ड्राइविंग लाइसैंस और आरसी बनाने पर पंजाब सरकार ने रोक लगा दी है। सरकार ने ये आदेश ट्रांसपोर्ट विभाग में हुए घोटाले के बाद दिए हैं। डा. कमलजीत सिंह सोई की तरफ से कैप्टन सरकार के ध्यान में लाया गया था कि बादल सरकार के समय लाइसैंस व आरसी बनाने वाली निजी कंपनी ने ट्रांसपोर्ट विभाग की मदद से 124 करोड़ रुपए का घोटाला किया था।


घोटाले का खुलासा होने पर सरकार ने कंपनी की 22 करोड़ रुपए की अदायगी रोक दी थी। सरकार ने उस कंपनी के साथ समझौता भी रद्द कर दिया था। गौरतलब है कि इन आदेशों के चलते डीसी दफ्तर में लाइसैंस और आरसी की एप्लीकेशन ली जाएगी लेकिन लाइसैंस और आरसी प्रिंट करके नहीं दी जाएगी। सरकार ने एप्लीकेशन लेने पर रोक नहीं लगाई है जिसके चलते पंजाब सरकार के अगले आदेशों तक पंजाब में लाइसेंस और आरसी बनाने पर रोक लग गई है।

बता दें कि ट्रांसपोर्ट विभाग विचार कर रहा है कि यह ठेका केंद्र सरकार के लाइसैंस बनाने वाली कंपनी को ही दे दिया जाए। जानकारी मुताबिक ड्राइविंग लाइसैंस और आर. सी. जारी करने में पिछली सरकार की कथित धोखाधड़ी को उजागर करने के लिए चण्डीगढ़ प्रैस क्लब में कैग की रिपोर्ट के आधार पर एक प्रैस कांफ्रैंस की गई जिस दौरान आरोप  लगाए गए कि पिछली सरकार ने ड्राइविंग लाइसैंस और रजिस्ट्रेशन की फीस तयशुदा रेटों से काफी ज्यादा रखी हुई थीं, जिस कारण आम जनता को करोड़ों रुपए का नुक्सान हुआ है। कांफ्रैंस में मांग की गई कि संबंधित कंपनी से यह पैसे वसूले जाएं और उसे सजा भी दी जाए। 


पंजाब सरकार ने साल 2011 में 'मैसर्स स्मार्ट चिप' प्राईवेट लिमटिड के साथ एक समझौता किया था, जिसमें पंजाब के यातायात दफ्तर में ई-गवर्नेंस शुरू करते हुए स्मार्ट कार्ड आधारित ड्राइविंग लाइसैंस और मोटर वाहन रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र जारी करन के लिए इसे लाइसेंस दिया गया। इस कंपनी ने केंद्र सरकार की तरफ से निर्धारित 45 की जगह पर 65 रजिस्ट्रेशनों के लिए, 136 रुपए ड्राइविंग लाइसैंस के लिए फिस वसूलनी शुरू कर दी थी जो कि नाजायज है। 

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