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जालंधर में विज्ञापन पोलिसी की धज्जियां उड़ा , अवैध रूप से लाखों हड़प रही है कई विज्ञापन एजेंसियां और नामी मॉल  नगर निगम ने बाँधी आँखों में पट्टी , कई बारी पूछने पर भी नहीं मिलता जवाब और न होती है कोई कार्यवाही 

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जालंधर 
ब्यूरो रिपोर्ट 

जालंधर में विज्ञापन के नाम पर लाखों का व्यापार हर महीने है जो की हर साल कई प्रतिशत के दर पर बढ़त  की ओर है , मगर ये कमाई कानूनी रूप से नगर निगम को जानी चाहिए जिससे नगर निगम शहर का विकास कर सके | मगर मिलीभगत के कारण ये कमाई कुछ लालची अफसरों के साथ ही कुछ विज्ञापन एजेंसियो को भी  जा रही है | 


नई  विज्ञापन पोलिसी के अनुसार , कोई भी शॉपिंग मॉल अपने मॉल की दीवारों पर अंदर या बाहर विज्ञापन नहीं लगा सकता और सिर्फ उन दुकानों के विज्ञापन जो की मॉल में मौजूद है  वे ग्राउंड माउंटेड विज्ञापन  बोर्ड ही लगा सकते है , मगर ऐसा कुछ होता नज़र नहीं आ रहा |

BMC चौंक नज़दीक पड़ते एक मशहूर मॉल ने भी अपने मॉल के अंदर बाहर और दीवारों पर विज्ञापन लगा रखे है और ग्राउंड माउंटेड के नाम पर कुछ नहीं नज़र आया  है , मॉल के अंदर लगे विज्ञापनों में से 90 % तक बाहर के कार्यो का विज्ञापन है जो की नई पोलिसी के आधार पर गलत है | 

 

वही बात की जाए बस स्टैंड , रेलवे स्टेशन इतियादी की तो वहाँ भी नगर निगम विज्ञापन पॉलिसी में साफ साफ लिखा है कि किसी भी एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन व बस टर्मिनल में विज्ञापन लगाने की अनुमति नही दी जा सकती ।परन्तु फिर भी जालन्धर रेलवे स्टेशन के बाहर विज्ञापन की कतार लगी हुई वो भी एक ही  विज्ञापन एजेंसी की।
 उक्त विज्ञापन एजेंसी द्वारा  लगे बड़े बड़े विज्ञापन बेशर्मी से अभी तक वहाँ लगाए हुए है ।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी से पता चला है उक्त विज्ञापन एजेंसी के मालिक द्वारा मोटी रकम रु50,000 से लेकर 1 लाख तक ( एक बोर्ड के )  ले कर उस जर्जर इमारत पर अवैध विज्ञापन लगा रखे है।

 

 पंजाब सरकार की नई विज्ञापन पोलिसी के तहत किसी भी पब्लिक प्लेस पर कोई भी व्यक्ति विज्ञापन सम्बन्धी कोई भी डिस्पले बोर्ड बिना अनुमति के और सरकारी फीस दिए बिना नहीं लगा सकता , मगर यह सब कागजों तक ही सीमित है। हकीकत में  शहर के कई पॉश इलाकों में अवैध विज्ञापनों का गौरखधंधा जोरों पर चल रहा है जोकि माडल टाऊन, डिफैंस कालोनी, अर्बन एस्टेट, छोटी बारादरी मार्किट, बस स्टैंड के सामने दोआबा मार्किट, नरिंद्र सिनेमा, एमबीडी माल के अंदर, आईवीवाई व्लर्ड स्कूल सामने , कमल पैलेस, रिम्पी रेडियो , माईहीरा गेट, जीएस हांडा, आर.एस.गलोबल ,रणजीत नगर, एजीआई बिस्नैस सैंटर, बस स्टैंड के अन्दर , क्योरो माल आदि कई मंहगी लोकेशनस पर बिना मंजूरी चलाया जा रहा है।

जब हमने निगम में इस सम्बन्धी कुछ अफसरों से बात करनी चाही तो कई अधिकारियों ने फ़ोन ही नहीं उठाये | वही जब काफी समय के बाद जॉइंट कमिश्नर आशिका जैन से बात की गयी की काफी जगह विज्ञापन पोलिसी का उलंघन किया जा रहा है तो इस बारे वे कब एक्शन लेगी ? ,तो उन्होंने कहा की इस बारे में उन्हें फिलहाल कोई जानकारी नहीं है वे दुबारा फ़ोन करके हमें जानकारी देंगी , मगर काफी समय बाद भी निगम की तरफ से न तो कोई जानकारी मिली और ना ही कोई एक्शन लिया गया | 

आपको बता दे की पहले , कुछेक लोगों को पंजाब नगर निगम एक्ट 1976 की धारा 123 के तहत नोटिस जारी किए गए थे जिनका कोई ज्वाब नहीं आया।

 

कानूनन नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद प्रत्येक विज्ञापनदाता से प्रत्येक दिन का जुर्माना वसूलने के साथ विज्ञापन का हटाना जरूरी होता है जिस पर अमल न करने की बजाए रिमाईंडर भेजे गए।

 एमबीडी मॉल नोटिस नंबर 1077 तिथि 23 अक्तूबर 2018
जीएस हांडा नोटिस नंबर 1078 तिथि 23 अक्तूबर 2018 रिमांईडर 29 नवंबर 2018
 आरएस गलोबल नोटिस नंबर 1079 तिथि 23 अक्तूबर 2018 रिमांईडर 1090/ 29 नवंबर 2018
 जनश्री नोटिस नंबर 1081 तिथि 23 अक्तूबर 2018 रिमांईडर 1092/ 29 नवंबर 2018
 पिरामिड नोटिस नंबर 1082 तिथि 23 अक्तूबर 2018 रिमांईडर 1093/ 29 नवंबर 2018
 आईवीवाई नोटिस नंबर 1060 तिथि 26 सितंबर 2018 रिमांईडर 1070/ 12 अक्तूबर २०१८

सभी कानूनी कार्यवाहियां सिर्फ जनता की आँखों में धुल झोंकने के लिए की गयी है जो की सिर्फ कागज़ो तक सीमित रह गयी , असल में कोई भी ज़मीनी कार्य नहीं किया गया , सिवाए गढ़ा रोड पर बाहर लगे स्टैन्डीस हटाने के जो की सिर्फ डायरेक्शन के लिए इस्तेमाल किये गए थे | 

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