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जालंधर के CT पब्लिक स्कूल , मकसूदा कैंपस में हुआ हंगामा  बीमार छात्रा समेत 3 विद्यार्थियों को परीक्षा देने से रोका और स्कूल के अंदर आने से किया मना तीन घंटे बाद मौके पर पहुंची पुलिस तो प्रिंसिपल ने गेट का ताला खुलवा ,बात कर अपनी सफाई दी  स्कूल प्रशासन

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जालंधर के CT पब्लिक स्कूल मकसूदा कैंपस में उस समय हंगामा हो गया जब स्कूल प्रशासन की तरफ से गेट पर ताला लगा दिया गया और बीमार छात्रा समेत तीन विद्यार्थियों को परीक्षा देने से रोक दिया गया | 
मामला सोमवार सुबह करीबन 8 बजे का है जब स्कूल के बाहर तीन छात्र अपने माता पिता के साथ बाहर धूप में खड़े हुए थे , कारण था की स्कूल की तरफ से गेट पर ताले लगा दिए गए और बच्चो के पैरेंट्स की बात तक नहीं सुनी गयी | 

VIDEO 1 - VIEW OF PARENTS AND BOUNCERS IN SCHOOL

पैरेंट्स के अनुसार एक बच्ची जो की 12 वी कॉमर्स की छात्रा है सेजल वो सिर्फ 5 ही मिनट लेट आई थी मगर स्कूल वालो ने गेट पर ताला लगा दिया और उसे अंदर नहीं जाने दिया और परीक्षा नहीं देने दी | वही ये भी बताया की स्कूल की बस जो की उसके आने के आधे घंटे बाद आई उसे अंदर जाने दिया मगर उसे नहीं | उन्होंने कहा की ये जेल नहीं स्कूल है कम से कम परीक्षा में ना रोके , क्या डिसिप्लिन पूरे साल सिर्फ परीक्षा के दिनों में ही होता है ? 

दूसरी बच्ची सुहानी 6th में पड़ती है और उसे वायरल बुखार था मगर उसकी माँ उसे स्कूल लेकर आई की वो अब ठीक है और परीक्षा दे सकती है , मगर स्कूल के अनुसार दुसरे बच्चो को भी वायरल हो सकता है इसीलिए उसे रेस्ट करने को कहा गया , जबकि उनके अनुसार बच्चे के फ्यूचर का सवाल है ! मगर जब पैरेंट्स ने अंदर बात की तो प्रिंसिपल के अनुसार बीमार हुए बच्चो को या स्पेशल केस में उनके पास स्कूल में ऐसा कोई प्रबंध नहीं है की बच्चो को अलग क्लास में इंविजिलेटर के सामने बैठाया जाए | प्रिंसिपल ने ये भी कहा की ऐसा कुछ होने पर स्कूल को पहले इन्फॉर्म करना चाहिए क्यूंकि उन्हें बहुत से तैयारियां अलग से करनी चाहिए | क्या स्कूल की ये ज़िम्मेदारी नहीं की ऐसी व्यवस्था पहले से हो ? क्यूंकि मॅहगी स्कूल फीस और इयरली फीस के बाद भी ऐसे बयान आना गैर ज़िम्मेदाराना रवैया है स्कूल का |

वही तीसरे बच्चे राजवीर वर्मा के भी पैरेंट्स ने हंगामा किया , वो 6th  क्लास का छात्र है और स्कूल के अनुसार उसने 6 महीने की फीस नहीं दी थी जिसका की पैरेंट्स को कई बार नोटिस दिया गया , उसे दो पेपर भी देने दिए मगर फीस न आने पर उसे आज परीक्षा देने से रोका गया था | 

स्कूल प्रशासन द्वारा हर बिल्डिंग में रखे जाते है ऑन ड्यूटी बाउंसर ( बदमाश ) 

CT मैनेजमेंट के द्वारा हर स्कूल कॉलेज की बिल्डिंग में प्राइवेट ( बाउंसर्स ) बदमाश किस्म के लोग ऑन ड्यूटी रखे गए है | अगर कोई भी पैरेंट्स या कोई और मैनेजमेंट के खिलाफ कुछ बोलता है या उनके द्वारा रूल नहीं मानता तो इन बदमाशों को पूरा हक़ दिया जाता है की वो बदतमीज़ी के साथ साथ हाथापई पर भी उतर आते है | 
आज के इस मामले में जहा पैरेंट्स ने भी आरोप लगाए की जब उन्होंने प्रिंसिपल या एम.डी. से मिलने की मांग की तो उन्होंने गेट पर सिक्योरिटी की जगह अपने बदमाश ( बाउंसर्स ) तैनात कर दिए गए जिन्हे वे सिक्योरिटी कहते है | इन्होने पैरेंट्स को भी धमकाया और डंडे भी लाकर रख लिए | इन बदमाशों को न तो बोलने की तमीज है और न ही किस से कैसा व्यवहार करना है वो आता है जिससे ये अनपढ़ गवार साबित होते है ! 
जैसे ही मीडिया , पुलिस के साथ मैनेजमेंट के से बात करने के लिए अंदर दाखिल होता है तो बाउंसर धमकाने लग जाते है की ' कैमरा बंद करलो यहाँ नहीं चलेगा तुम्हारा मीडिया ' |
जब मीडिया को बिल्डिंग के अंदर जाने से रोका गया तो बाहर से ही कैमरा चलाने लगे , जिसके बाद बदमाशों ने अपनी बदमाशी करते हुए मीडिया के कमरे को भी हाथ लगाया और हाथापाई पर उतर आये | सारा मामला लाइव वीडियो में कैद हो गया जिसे अब तक हज़ारो लोग देख चुके है | 

वही जब इस मामले में स्कूल की प्रिंसिपल पूनम गोबिंद राम से बात की गयी तो उन्होंने लाइव कमरे में माफ़ी मांगी और आगे से ऐसा ना होगा कहने लगी | मगर सवाल ये आता है की क्या स्कूल और कॉलेज , जिसे हम विध्या का मंदिर कहते है और जहाँ बच्चे पढ़ने के लिए जाते है वह ऐसे बदमाश किस्म के लोग मैनेजमेंट द्वारा ड्यूटी पर रखने चाहिए ? अब क्या स्कूल अपनी मनमानी , अपनी गुंडागर्दी से स्कूल चलाएंगे ? कैसा होगा बच्चो का भविष्य ? क्या यही है सरकार का नारा ' बेटी पढ़ाओ और बेटी बचाओ ' जहाँ बीमार बच्ची को तीन घंटे स्कूल के बाहर खड़े रखा और पेपर नहीं देने दिया ? 

अब क्या अपने बच्चो को आप इस CT स्कूल में या कॉलेज में या ऐसे किसी और शिक्षा संस्थान में पढ़ाएंगे ? 

 

स्कूल की  प्रिंसीपल पूनम  गोबिंद राम के पूरे मामले में आये बयान , दी सफाई 

VIDEO 2 - VIEW OF SCHOOL MANAGEMENT


सीटी पब्लिक स्कूल  में तीन परिवारों के  सदस्यों द्वारा  नियमों उल्लंघना की  गई। सीटी पब्लिक  स्कूल की  प्रिंसीपल पूनम  गोबिंद राम ने कहा कि  आज के  हंगामे के  लिए तीन परिवार ज़िम्मेवार  हैं। जिन्होंने सीटी पब्लिक स्कूल के  गेट पर ताला लगा स्कूल के  नियमों को  तोड़ा एवं स्कूल  प्रशासन द्वारा पुलिस को  बुलाया गया। 

पहला केस  राजवीर वर्मा का  हैं जो स्कूल की  6 ऐ कक्षा का  विद्यार्थी हैं। राजवीर वर्मा की  फीस काफी देर से  पेडिंग चल रही हैं। इस सबंध में राजवीर को  8 संतबर 2018  को  10 सतंबर 2018 के  दिन फीस जमा करवाने के  लिए परिवार वालों को  संदेश भी भेजा गया। जिसमें साफ लिखा हुआ था कि  फीस ना जमा करवाने पर विद्यार्थी को  पेपर नहीं देने दिया जाएगा। इसी के  चलते परिवार वालों को कई  बार संदेश भी भेजे गए। इस  सबंध में राजवीर को  रिसेपशन पर बिठाया गया और परिवार वालों को  बुलाया गया।

दूसरा केस सेजल का  हैं। सेजल बाहरवीं कक्षा में कामर्स की  छात्रा हैं। जो हर रोज स्कूल में लेट पहुंचती हैं।स्कूल गेट सुबह 7.35 मिन्ट पर बंद  कर दिए जाते हैं। सेजल हर रोज़  7.42 मिन्ट पर स्कूल लेट पहुंचती हैं। हमारे द्वारा छात्रा के  परिवार वालों को कॉल किया  गया। छात्रा के  परिवार वालों द्वारा मैनेजिंग डायरेक्टर की कार को  भी रोकने की  कोशिश की गई। इस में विद्यार्थियों एवं परिवार के  सदस्यों द्वारा प्रिंसीपल एवं वाइस प्रिंसीपल को  अपशब्द बोले गए। सेजल का  व्यवहार भी अस्वीकारीय था। जिस के  चलते सीटी पब्लिक  प्रिंसीपल ने सेजल को स्कूल  से निकालने का  फैसला लिया। लेकिन  सेजल के  परिवार वालों से  निवेदन करने से यह आखरी वार्निंग मानी गई। अब सेजल बाकी की  परिक्षाए दे सकती हैं।

तीसरा केस  6 बी कक्षा की  सुहानी का  हैं। सुहानी की  त्बीयत ठीक  नहीं थी। बल्कि  इस खराब त्बीयत के  चलते सुहानी परीक्षा देना चाहती थी। सुहानी की  मां सुबह सात बजे स्कूल में सुहानी की  परीक्षा के  लिए स्कूल में आई थी और उन्हें  प्रशासन के  फैसले की  वेट करने के  लिए कहा गया। लेकिन  सुहानी की  मां बिना किसी सुचना  के  आठ बजे स्कूल में परीक्षा के  लिए प्रवेश कर गई। लेकिन  लेट होने एवं बिमार होने की  वजह से विद्यार्थी को  परीक्षा के  लिए अनुमती नहीं दी गई। विद्यार्थी के  परिवार वालों को  पहले बच्चे की  सेहत पर ध्यान देने के  लिए समझाया गया। इतना समझाने के  बाद भी परिवार के  सदस्यों द्वारा स्कूल के  बाहर धरना दिया गया। बाद में पुलिस की  सहायता के  बाद सुहानी के  परिवार वालों को  समझाया गया एवं बाकी  पेपर देने के  लिए इजाजत भी दे दी गई।

प्रिंसिपल के कहा कि हम चाहते हैं कि  छात्रों के  परिवार वालों को स्कूल के  नियमों एवं अनुशासन को  समझना चाहिए और हमारे इस कार्य  में साथ देना चहिए।

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